
किसी की निगाह में
किसी की निगाह में खटकता था मैं जब उनके पनाह में रहता था मैं वो राह में छोड़कर चल दिये जिसको अपना कहता था मैं

किसी की निगाह में खटकता था मैं जब उनके पनाह में रहता था मैं वो राह में छोड़कर चल दिये जिसको अपना कहता था मैं

मुझे किसी बात का न गुरूर हो पाये दयाल तेरे नाम का बस शुरू हो जाये न दुनिया की चाह है न चाहत है अमीरी

धर्मराज के दरबार में जब तेरा हिसाब होगा तेरे गुनाहो का वहाँ किताब होगा अगर हाथ तुने पकड़ा न समर्थ गुरू का काल के देश

भाई मुझे भुल न जाना याद रखना पापा की थी परी बस याद रखना बचपन मेरा गुजरा कुछ यादे जुडे है कुछ खट्टे कुछ मीठे

चला आऊंगा तेरे दर मेरा वादा यही लेकिनमिलाना आंखों से आंखें छुपाना ना कभी लेकिनमिले ना हार फूलों का मुझे तुझसे भले लेकिनहमारे हो गले

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करोतोड़ कर दिल को किसी का मुस्कुराया न करोसारी ये जिंदगी तो हंस के गुजर जाएगीयाद करके

जब से बूंदे पड़ी आंखों की हैतब से दिल में नमी ही नमी हैमिल गया जब से मुझको ये सावनतब से मन में खुशी ही

जो देखा एक गुलाब तो दिल ये मचल गयाकांटा नहीं था फिर भी वो सीने मे चुभ गयाकहते हैं लोग पंखुड़ी कोमल गुलाब कीपर छुआ
हे अभावों से जन्मी चपल बालिकेअब मेरे घर ना आना तू फिर से कभीमेरे जीवन में खुशियां ही छाई रहेना शिकन मेरे मस्तक पे लाना
नहीं , मैं सागर नहीं हूँकि तुम्हारे द्वारा फेंके गयेशिला-खण्डों कोज्वार-भाटे के जबड़े में जकड़ लूँ ताल हूँतुम्हारा लघु पत्थर भीआन्दोलित कर जाता हैकेन्द्र से