कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करो
तोड़ कर दिल को किसी का मुस्कुराया न करो
सारी ये जिंदगी तो हंस के गुजर जाएगी
याद करके भी उन्हे तुम जो भुलाया ना करो
तुझे कोई देख ना ले आसमां के चंदा में
अपने चेहरे से कभी पर्दा हटाया न करो
मयकदे आंख में ना डूब जाए सारा जहां
अपनी आंखों से किसी को भी पिलाया न करो
जो भी कहता हो ये दिल उसको आज कहने दो
दिल से जो बात उठी उसको दबाया न करो
सबके दिल पर तो बिजली सी गिर जाएगी
अपनी पलकों को उठा कर के गिराया न करो
पास रह कर के ही सावन को विखेरो सब में
दूर जाकरके कभी दिल को जलाया न करो
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


