जब से बूंदे पड़ी आंखों की है
तब से दिल में नमी ही नमी है
मिल गया जब से मुझको ये सावन
तब से मन में खुशी ही खुशी है
यह धड़कता है दिल मेरा क्यों अब
पास में मेरे जब तू ही तू है
जितना होता हूं मैं पास तुझसे
लगता दिल में अभी कुछ कमी है
है समंदर से ज्यादा ही गहरा
बूद आखो मे जो ये भरी है
आग तब ये लगाता है सावन
चाह मिलने की जब-जब जगी है
मैं तड़पता था पाने को खुशियां
जब तलक तू तो मेरी नहीं थी
मैं सवरता रहा अब तो हरदम
जब से तू मेरी अपनी बनी है
जब से मैंने तुझे चुन लिया है
अब कली कोई चुननी नहीं है
तुम निभाना मेरा साथ हर दम
अब ये इच्छा दिलों में जगी है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


