चला आऊंगा तेरे दर मेरा वादा यही लेकिन
मिलाना आंखों से आंखें छुपाना ना कभी लेकिन
मिले ना हार फूलों का मुझे तुझसे भले लेकिन
हमारे हो गले में हार बाहों का तेरे लेकिन
भले हम हार बैठे हो मिले सुख जीत का लेकिन
कभी हो हारने का गम न जीवन में मेरे लेकिन
दिखे ये चांद तुझमें या दिखे तू चांद में लेकिन
तुझे बस मैं ही देखूं दूसरा ना देख ले लेकिन
ये तेरा चांद सा मुखड़ा भले पर्दे में हो लेकिन
कहीं मुखड़ा ना छिप जाए हटाना पर्दे को लेकिन
दिखाना जो गुलाबों से भी हो मीठी यहां लेकिन
तुम्हारे दिल की रौनक हो महकती फूल सी लेकिन
मैं तुझको मांग लूंगा जिंदगी भर के लिए लेकिन
निभाना साथ हो मुझसे ना फिर हो गैर से लेकिन
मिले ना जब तलक मुझको गली में ही रहूं लेकिन
गली का रास्ता मेरे बनाना तुम यहां लेकिन
सरल सा रास्ता तेरी गली का है बहुत लेकिन
यही जीवन का मेरे है कठिन सा रास्ता लेकिन
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


