
श्री कृष्ण की महिमा
श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान श्रीकृष्ण मेरे नटखट गोपाल, यमुना के तट पर रचाये रास। माता इनकी देवकी मैया, यशोदा के भी कहलाए लाल। बचपन

श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान श्रीकृष्ण मेरे नटखट गोपाल, यमुना के तट पर रचाये रास। माता इनकी देवकी मैया, यशोदा के भी कहलाए लाल। बचपन

माना- जीवन के ये रास्ते बहुत लंबे है, चारों ओर बाधाएँ है, अंधेरा है, रुकावट है, लेकिन ये लंबे रास्ते पल भर में कट जाएंगे,

जब दिल था निर्मल और चहरे पर मुस्कान थी। न कोई चिंता और न कोई थकान थी। हर सुबह थी नहीं उमंगों से भरी, और

धरती माँ की गोद है प्यारी, इसकी रक्षा सबकी जिम्मेदारी। वृक्षों को मत काटो यार, ये हैं जीवन के आधार। पेड़ लगाओ, जल बचाओ, स्वच्छ

सावन का महिना सावन सबके लिए खुशहाली लेकर आता है। यह सावन बच्चे, बूढ़े सबको भाता है। चारों ओर फैली हरियाली की चादर, सबके मन

शिव की महिमा बर्फीली चोटियों पर विराजमान, कैलाश है उनका निवास। तीन नेत्रों में ज्योत जलती, हर युग में जिनका है वास। शिव की जटाओं

दोस्ती की राहें होती हैं अनमोल, उसका नहीं चुका सकता कोई मोल। तूफानों में भी जो साथ रहे, हर दुख में अपने पास रहे। हंसते-हंसते

उठो नारी और लड़ो अपने लिए, कोई नहीं आएगा तुम्हें बचाने। खुद को सबल बनाओ इतना, कोई हाथ डाल न सके तुमपर कोई। समय आ

रक्षाबंधन: भाई-बहन का प्यार भाई-बहन का रिश्ता प्यारा, अनोखा, अलग और निराला। भाई-बहन आपस मे झगड़ते, कुछ देर बाद फिर मिल जाते। एक दूसरे से

कलम का पुजारी, मनमौजी फनकार हूं।साधक हूं शारदे का, वाणी की झंकार हूं। शब्दों की माला बुनता, कोई कलमकार हूं।गीतों की लड़ियों में, सुर छेड़ती