कविता

Category: कविता

कविता

अंधेरा अंदर नहीं बाहर है

मनुष्य अभीप्साओं का पिंड ही तो हैजीवनभर चला करता हैतमन्नाओं का सिलसिला ।एक के पास दूसरी इच्छा।अंतहीन सफर।तुष्टि अनवरत खोज ।एक बसेरा निकेत बन जाएतो

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कविता

कठिन है रास्ता लेकिन

चला आऊंगा तेरे दर मेरा वादा यही लेकिनमिलाना आंखों से आंखें छुपाना ना कभी लेकिनमिले ना हार फूलों का मुझे तुझसे भले लेकिनहमारे हो गले

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कविता

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करो

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करोतोड़ कर दिल को किसी का मुस्कुराया न करोसारी ये जिंदगी तो हंस के गुजर जाएगीयाद करके

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