कविता

Category: कविता

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जीवन तेरा मुस्कुराता रहेगा

अगर ज्ञान का दीप जलता रहेगाखतम ओ अंधेरे को करता रहेगाअगर ना जलाया तू दिल मे ये दीपकअंधेरा सदा तुझको छलता रहेगासदा ही दिलों मैं

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कविता मात्र कागज पर कलम से लिखी गई कुछ पंक्तियाँ नही हैं। उसका हर शब्द केवल वर्णमाला का योग नहीं है, जो आपस में जोड़

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गंगा माँ

सबसे शीतल सबसे पावन, गंगा मां है धार तुम्हारी, तेरे चरणों का मैं सेवक, तुम जग की तरण हारी, कोई भागीरथी कहता है, कोई सुर

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प्रकृति चित्रण

पीली पीली सरसो फुलाके यहां चारों ओरपूरे इस जहां के हर दिल में ही छाई हैइसी के बगल में ही मटर भी फुलाई हुईछोटे श्वेत

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आवाज उठाओ

एक आवाजपुकार बन उभरीतो हजारों कदमकारवां बन जुड़ गएआग्रह शांत और विनीत थातो क़दमों का शोरसुरीली लय बन गयानारों में सच की आत्मा थी तोघनघोर

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तू गा तो सही मुस्का तो सही

सुबह के पन्नों पर पायीशाम की ही दास्ताँएक पल की उम्र लेकरजब मिला था कारवाँवक्त तो फिर चल दियाएक नई बहार कोबीता मौसम ढल गयाऔर

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साँची आंखें

शब्द से चेतना तक फैले हुए हैंहर तरफ नयन ही नयननयनो की अपनी लिपिअपनी भाषा अपनी विधाअपनी सूक्तियांअपने दोहे अपनी चौपाइयांनयनो के अपने सरोवरअपने सागर

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परेशान आदमी

परेशान आदमीशायद जानता ही नहींजहाँ राह खत्म होती हैवहीं शुरू होती हैनई मार्ग रेखाएंबस दो कदम और चलतातो तसव्वर से ज्यादा मिलने वाला थाअसबाब हो

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