पीली पीली सरसो फुलाके यहां चारों ओर
पूरे इस जहां के हर दिल में ही छाई है
इसी के बगल में ही मटर भी फुलाई हुई
छोटे श्वेत पुष्पों से जग हर्षायी है
अरसी चने का पौधा वह भी बड़ा सुंदर लागे
रंग-बिरंगे रूप में सारी धरा ये नहाई है
गाजर लहसुन धनिया भी छटा को विखेरे हुए
मेथी पालक मूली यहां रंग जमाई है
हरे हरे गेहूं से भरे हुए खेत यहां
पूरे ही धरा पे हरियाली बिछाई है
उड़ती सुगंध यहां सबकी ही अलग-अलग
घुलके पवन पूरा धरा महकायी है
गेदा गुलाब मुर्ग केश यहां खिले हुए
हरसिंगार ने तो शोभा बढ़ाई है
रातरानी बेला यहां खिलकर रातों को
चंपा चमेली ने भी जग महकाई है
बार बार देखू इसे दिन और रात को भी
मन ने मेरे भी यही इच्छा जताई है
ऐसा ही सुंदर यहां गांव का परिवेश होता
प्रकृति प्रफुल्लित हो के यहां मुस्काई है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


