
सबके दिल को ही शीतल करू मै
अब न रहना मुझे कैद होकरअब परिंदों की जैसे उडू मैना सिमट जाऊं मैं पिजड़े में हीउड़ान अब आसमां तक भरू मैचीज जितनी निराली जगत

अब न रहना मुझे कैद होकरअब परिंदों की जैसे उडू मैना सिमट जाऊं मैं पिजड़े में हीउड़ान अब आसमां तक भरू मैचीज जितनी निराली जगत

आसमान घिर गयी बदरियादेखो सावन आया हैझूले पड़ गए डाल-डालकोयल ने गीत सुनाया हैउपवन खिला-खिली धरतीचहुओर खुशी ही छाई हैघास फूस संग पुष्प खिलेछाई धरती

लालच के वशीभूत हो जो धन मे ही डूबेसुख में सदा ही साथ रहे दुख में जो छूटेमजबूरियों के लाभ जिनके शौक बन गयेपशु रूप

आज हम जलाएं प्रेम दीपक दिल के द्वारजिससे प्रकाशित हो ये पूरा संसारजग में अधेरा ना अज्ञानता का वाससब के दिलों में भरे प्रेम का

मैंने तुमको पाया जब से एक नया संसार मिलारोम-रोम में खुशियां भर गई जब से तेरा प्यार मिलारोज बसंती पवन चली चारों ओर खुशी का

बिछड़ के दूर तुमसे मैं कभी जो जाऊंगाकरूंगा याद तुमको और याद आऊंगाओठ खामोश ही रह जाएंगे भले लेकिनबनके धड़कन सदा ही दिल में गुनगुनाऊंगाएक

अगर सुन सको तो कहूं मन की बातें ।सुलझा सको तो खोल दूं मन की गांठें ।। तुम्हीं ने कहा था समझदार हो तुम ।सुख-दुख

सागर की तूफानी लहरों में, इक तिनका सहारा है ।।मंजिलें और भी होंगी, कदम मेरा कब हारा है ।। हौसला है तो मंजिल है, मंजिलों

बहुत मन कर रहा है कि आप मुझसे बात करो ।लेकिन मेरी जिद यह है कि शुरुआत भी आप करो ।। आपकी सुलझी बातों से

मत इतना गुमान कर वंदे एक दिन तो मिट जाना है । धन-दौलत, महले दो महले, मिट्टी में मिल जाना है ।। बल, साहस, शक्ति