मैंने तुमको पाया जब से एक नया संसार मिला
रोम-रोम में खुशियां भर गई जब से तेरा प्यार मिला
रोज बसंती पवन चली चारों ओर खुशी का साज मिला
फूल ही फूल खिले दिल में कभी कांटो का ना ताज मिला
पग पग हरदम साथ चलें हम ऐसा तेरा साथ मिला
नहीं कभी गम मिला मुझे तो खुशियों का भंडार मिला
स्वच्छ धवल नित चांदनी जैसा मुझको सुख का धाम मिला
हरियाली छाई दिल मे और शीतलता का भाव मिला
भावो में जब डूबे दोनों भावों को विस्तार मिला
बातों में मिश्री घोली जब प्रेम का दिल संचार हुआ
नैनो में जब डूब गए तब सागर का एहसास हुआ
मुझको तो जीवन मे अब एक सच्चा सा इंसान मिला
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


