कविता

Category: कविता

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नया एक गुल खिलाओ तो कभी जाने

मिलाकर नैनो से नैनाकरो बातें तो हम जानेना हो ओठो पे कंपनमौन दो उत्तर तो हम जानेसमझ कर मन की पीड़ा कोबहावो प्रेम की नदियांभरा

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दिलों के फूल है

तेरे हर एक लहजे से मुखातिब फूल हैंसदा ही चूमते अशआर तेरे फूल हैकभी ना तोड़ना खिलते हुए इस फूल कोसदा मुस्कान भरते ये दिलों

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किनारा कर लिया मैंने

धधकते आज शहरों से किनारा कर लिया मैंनेअब अपने गांव में रहकर गुजारा कर लिया मैंनेचमकती सड़के ना देखी न देखी तीव्रतम चालेअंधेरी गलियों में

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बीतती खुशियों में जिंदगी है मेरी

शाम के जश्न का हाल पूछो ना अबमुस्कुराती हुई हर सुबह है मेरीदिन तो रोशन हुआ शाम हर सुरमईबीतती खुशियों में जिंदगी है मेरीप्रेम में

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इंद्रधनुषी नाव

आसमा पर इंद्रधनुषी नाव अब चलने लगीखो ना जाए आसमां में सोचकर डरने लगीबैगनी थे यात्री उस पर श्वेत खेवनहार थाचल रही थी जिस जगह

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प्रेम का बीज

प्रेम का बीज बोया था जो भी यहावो ह्र्दय खेत मे अंकुरित हो गयाअब फसल प्रेम की लहलहाने लगीसारा जीवन मेरा प्रेम मय हो गयादेखा

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दिल के फूल

उसके भावो में जो डूबा एक कली सी खिल गईरंग रूप से ही उसके खुशबू अब बिखर गईतोड़ ना ले जाए दूजा कोई उसको बाग

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