शाम के जश्न का हाल पूछो ना अब
मुस्कुराती हुई हर सुबह है मेरी
दिन तो रोशन हुआ शाम हर सुरमई
बीतती खुशियों में जिंदगी है मेरी
प्रेम में डूब दिल जबसे उपवन बना
तब से कलियां दिलों में मेरे खिल गई
अब तो हर एक समय गीत होठों पे है
आज महफिल दिलों की तो फिर सज गई
ऐसा लगता कोई जैसे जादू चला
कितनी सुलझी हुई जिंदगी हो गई
आसमा चांद से ना उजाला हुआ
दिल जमी चांद रोशन सी होती गयी
दिल ने चाहा कभी जब किसी चांद को
रोशनी चांद दिल मे उतरती गयी
जिंदगी सिलसिला यूं ही चलता रहा
उम्र तो अपने रंग में ही ढलती गयी
भाग्य जीवन का मेरे निखरता रहा
प्रेम दिल डूब पावन सी करती गयी
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


