
जिंदगी ख्वाब है
जिंदगी ख्वाब है इस ख्वाब में क्यों जीते होजिंदगी प्याला गरल का इसे क्यों पीते होजितना जीवन में मिला उसको ही पूरा समझोऔर पा जाऊं

जिंदगी ख्वाब है इस ख्वाब में क्यों जीते होजिंदगी प्याला गरल का इसे क्यों पीते होजितना जीवन में मिला उसको ही पूरा समझोऔर पा जाऊं

आजकल आप क्यू बात करते नहींकितना मुझसे तेरा फासला हो गयागांठ दिल में तेरे ऐसी क्यू पड़ गईआज मैं भी पराया सा दिखने लगातूने मुझको

आज अमावस रात अंधेरी उस पर दीप जलाएंगेकरके उजाला इस जग में हम दूर अधेरा भगाएंगेसब कुछ जगमग जगमग करके मन का भाव जगायेंगेरोशनी की

गर तेरा भाव मेरे भावो में डूबा होतामाधुरी रात बनके दिल में उजाला होताकभी ना देखता मैं आसमा के चंदा कोदिल में चेहरा तेरा गर

गुमसुम उदास सी बैठी क्यों तुम गीत कोई तो सुनाओ नाखिला के चारों ओर सुगंधित उपवन को महकाओ नाना हो जाए धुंधली ज्योति नैनो को

आज पूर्णिमा के अवसर पर गंगा के स्नान सेपावन ये जीवन हो जाए तन मन भीगे भाव सेगंगा की लहरें जब उठती मन में हिलोरें

बीते लम्हों को कभी याद जो मैं करता हूंथकी आंखों में मेरे अश्क नजर आते हैंनहीं छुपा के रखता बात जो भी दिल में कभीखुली

जिंदगी है एक नदी जो हर दम ही बहती रहेजिंदगी एक शाम सी जो रोज ही ढलती रहेजिंदगी तो धूप सी जो रोज ही तपती

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

जिंदगी के सफर में यूं ही घूमता हूंहवाओं के संग में ही मैं झूमता हूंवादियां जो प्रकृति की प्रफुल्लित खिली हैंउसी में ही जीवन का