आज अमावस रात अंधेरी उस पर दीप जलाएंगे
करके उजाला इस जग में हम दूर अधेरा भगाएंगे
सब कुछ जगमग जगमग करके मन का भाव जगायेंगे
रोशनी की इस आभा से जीवन सबका चमकाएंगे
जगमग होगी पंक्ति यहां पर तेल का दीप जलाएंगे
अपने गुण के दीपक से ही सबको राह दिखाएंगे
करके उजाला इस जीवन में दिल में प्रेम जगायेंगे
रहे कभी ना कोई भूखा सबको आज खिलाएंगे
महलों में दीप जले हो भले कुनबो में दीप जलाएंगे
सब को लेकर साथ में अपने आज दिवाली मनाएंगे
भरकर सुगंध इस जीवन में सब का जीवन महकाऐगे
स्वयं प्रकाशित होगे और जग में प्रकाश फैलाएंगे
सूर्य चंद्र ना बन मै सकूं पर बन तारा टिमटिमांएगे
काली रात अंधेरी में भी सारे गगन पे छाएंगे
धरती से लेकर अंबर तक का साथ यहां दे जाएंगे
बनकर उजियारा जीवन में सबको पथ दिखलाएंगे
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


