कविता

Category: कविता

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हजार खूबियां देखी कमी वफा देखा

उसकी आंखों में मैंने उठता वो मंजर देखाघाव दिल में बनाते आंख का खंजर देखाकरके तिरछी निगाहे ओठ पे मुस्कान लिएखिलते महलो को बनाते हुए

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मेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा

मेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।दर्द मेरे जख्मों का होगा तेरा अल्फाज होगा।।तेरी बेवफाई पर कई सवाल उठेंगे ।भरी महफिल में मैं तुझे

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सकारात्मक सोच

होता उसका जीवन निर्मल जिसकी सोच सही होती हैअगर सोच हो सकारात्मक जीवन में खुशियां भरती हैगलत सोच रखकर के मन में काम यहां जो

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जिंदगी एक जैसी गुजरी हो

मैंने हंसकर के गुजारी है जिंदगी अपनीभले ही जिंदगी कांटों से होके गुजरी होसदा ही ठोकरो से सीखा संभलना मैंनेभले ही जिंदगी मे ठोकरे ही

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