पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

मीत

बस गए जो दिल में आके दिल के वही मीत थेदिल से जो निकल गए ओ ढोग के प्रतीक थेस्वार्थ भाव जब उगा भावना के

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कविता

कठिन है रास्ता लेकिन

चला आऊंगा तेरे दर मेरा वादा यही लेकिनमिलाना आंखों से आंखें छुपाना ना कभी लेकिनमिले ना हार फूलों का मुझे तुझसे भले लेकिनहमारे हो गले

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कविता

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करो

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करोतोड़ कर दिल को किसी का मुस्कुराया न करोसारी ये जिंदगी तो हंस के गुजर जाएगीयाद करके

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पद्य-रचनाएँ

पालक (पिता)

एक दिन पालक ने पूछा ये तो बतलाओ मुझेकितना मेरा भाव है कुछ तो समझाओ मुझेगर्मियों में भाव कितना ठंडी में क्या भाव हैखेत में

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