पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

जीने की राह

न हम होंगे न तुम होगे नहीं कोई गिला होगासिमटती याद का ही फिर यहा पर सिलसिला होगाचलो हंस कर बिता ले जिंदगी को जो

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कविता

कर्म और उसके फल

कितना आसान होता है, कुछ नामुरादों के लिए,रिश्तों में कपट करना, छ्लना, फरेब करना।अपनी बातों से फिर जाना, पलट जाना।अपने स्वार्थ् में अँधा हो जाना।रिश्तों

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कविता

स्त्री, स्वरुप शक्ति का

स्त्री के बिना क्या सोचा जा सकता ये संसार??स्त्री के बिना क्या सोचा जा सकता घर परिवार??स्त्री के बिना क्या हो सकता समाज का उद्धार??

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पद्य-रचनाएँ

चिड़ियाँ रानी

चिड़ियाँ रानी यूं मुस्का केतुम कहां जाती हो ?हां तुम कहां जाती हो ?चीं –ची करते हुए आकाश मेंउड़ क्यूं जाती हो ? डाल –डाल

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कविता

डूबने के लिए जिंदगी चाहिए

डूबता ओ नहीं भाव से जो मराडूबने के लिए जिंदगी चाहिएभीगे दुख में कभी भी ना आंखें तेरीभीगी आंखें सदा भाव में चाहिएबीते उपकार में

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कविता

याद करो

मैं भी तुमको याद करूं और तुम भी मुझको याद करोप्यासा जीवन रह ना जाए रिमझिम सी बरसात करोछुपा के रखा प्यार दिलों में कभी

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कविता

तुम्हारे बिना

अब तो रह ना सकूंगा तुम्हारे बिनागीत गा ना सकूंगा तुम्हारे बिनाचाहे कितनी भी मिल जाएगी रोशनीपर अंधेरा रहेगा तुम्हारे बिनासुख तो बदला है दुख

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कविता

उसको मंजिल लिख दिया

देखकर चेहरे को उसके गजल हमने लिख दियाडूब उसके भाव का सौंदर्य हमने लिख दियाकान की बाली सुशोभित उसके ऊपर हो रहीउसको तो मैं आसमान

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