अब तो रह ना सकूंगा तुम्हारे बिना
गीत गा ना सकूंगा तुम्हारे बिना
चाहे कितनी भी मिल जाएगी रोशनी
पर अंधेरा रहेगा तुम्हारे बिना
सुख तो बदला है दुख में तुम्हारे बिना
हर कदम लड़खड़ाता तुम्हारे बिना
अब तो गम का ये सागर भी गहरा हुआ
पार कर ना सकूंगा तुम्हारे बिना
ना हो आंखों में सपने तो टूटेंगे क्या
जब मिले ही नहीं साथ छूटेगे क्या
छोड़ कर के गए मुझको जिस मोड़ पर
मैं वहीं पर खड़ा हूं तुम्हारे बिना
कितने दिन तक चला हूं तुम्हारे बिना
जिंदगी से लड़ा हूं तुम्हारे बिना
अब जरूरत नहीं है किसी जीत की
जीत कर क्या करूंगा तुम्हारे बिना
सीप मैं और मोती ना बन पाए तुम
संग में मेरे हर दम ना रह पाए तुम
उम्र ढल तो गई मन ना बूढा हुआ
पर ये सूना रहा है तुम्हारे बिना
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


