
रहमत का असर है
रहमत का असर है सवर जाता हुँ मै याद कर के देख लो नजर आता हुँ मै माँ के दुवाओ का ही असर है दोस्तो

रहमत का असर है सवर जाता हुँ मै याद कर के देख लो नजर आता हुँ मै माँ के दुवाओ का ही असर है दोस्तो

हर दर पर सर झुके ये मुझे मंजूर नही है मेरे माँ से खुबसूरत जन्नत के हूर नही है मिली है मंजिल मुझे मेरे माँ

बस गए जो दिल में आके दिल के वही मीत थेदिल से जो निकल गए ओ ढोग के प्रतीक थेस्वार्थ भाव जब उगा भावना के

चला आऊंगा तेरे दर मेरा वादा यही लेकिनमिलाना आंखों से आंखें छुपाना ना कभी लेकिनमिले ना हार फूलों का मुझे तुझसे भले लेकिनहमारे हो गले

कभी हंसते हुए दिल को तो रुलाया ना करोतोड़ कर दिल को किसी का मुस्कुराया न करोसारी ये जिंदगी तो हंस के गुजर जाएगीयाद करके

एक दिन पालक ने पूछा ये तो बतलाओ मुझेकितना मेरा भाव है कुछ तो समझाओ मुझेगर्मियों में भाव कितना ठंडी में क्या भाव हैखेत में

जब से बूंदे पड़ी आंखों की हैतब से दिल में नमी ही नमी हैमिल गया जब से मुझको ये सावनतब से मन में खुशी ही

जो देखा एक गुलाब तो दिल ये मचल गयाकांटा नहीं था फिर भी वो सीने मे चुभ गयाकहते हैं लोग पंखुड़ी कोमल गुलाब कीपर छुआ
हे अभावों से जन्मी चपल बालिकेअब मेरे घर ना आना तू फिर से कभीमेरे जीवन में खुशियां ही छाई रहेना शिकन मेरे मस्तक पे लाना
दूरी बहुत है ज्यादा क्या रब मेरे मकां की नज़रे करम न अब तक मेरे प क्यों अयां की चर्चा हमारा हरसू क्यों आम हो