कविता

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राम रावण युद्ध

आज अंतिम चरण युद्ध का चल रहाराम पर भारी रावण जब पढ़ने लगामारकर राम की सेना को आज तोमद मे खोकरके रावण भी हंसने लगाशक्ति

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रावण कहता है

हे राम प्रिय हमारे लंका में अब पधारोकर के विनाश निशिचर हमको भी जग से तारोंहे राम प्रिय हमारेभटकता फिरू मै कब तक निशचर की

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रह जाते यदि राजा बनकर जीवन लक्ष्य ना पूरा होता

आज अवध के राजभवन का उत्सव भी गमगीन हुआजिसको मिलना राज सिंहासन उसको तो बनवास मिलायुद्ध कला पारंगत कैकेयी राजा का जब प्राण बचायाखुश हुए

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कल,आज और फिर कल

कल मैं छोटा सा नन्हां सा अनभिज्ञ शिशु था , कहां थी पहचान ,अपनों और परायों की , जिनसे थोड़ा सा लाड़ प्यार पा लिया

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मन पतंग

मन पतंग कर्म एक डोरी है, हरदम थाम के रखता हूं। फिर भी देखो उड़ता हीं जाता, थाम ना इसको पाता हूं ।। मन बावरा

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मंजिलें

बना लो राह खुद अपनी, मंजिलें दिख हीं जाएगी । यदि दृढ़ हो इच्छाशक्ति, मुश्किलें मिट हीं जाएगी ।। भले हीं लाख ओले अड़े होंगे,

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चेतना संदेश

जाग जाग रे ज्ञानी मानव, ज्ञान का दीप जला लेना। चकाचौंध की इस आंधी में, मानवता को ना खा जाना।। सोच जरा क्या पाया है

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हिन्दुस्तान के घाती पर

ऐलान करो अब लाल किले से,चढ दुश्मन की छाती पर।नहीं चलेगा मुल्क हमारा, देशद्रोहियों की थाती पर।दुश्मन देश के हित में जिसकी उमड़ रही हो

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प्रतिभा संग नैतिकता हो

परिवर्तन हो सुखद सादगी परख गुणो की व्यापकतायश फैले उत्कर्ष लेखनी प्रतिभा संग हो नैतिकताप्राप्त करें संसार सदा ही जो कृति गुण परिचायक होसदा जुड़ा

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जीवन तेरा मुस्कुराता रहेगा

अगर ज्ञान का दीप जलता रहेगाखतम ओ अंधेरे को करता रहेगाअगर ना जलाया तू दिल मे ये दीपकअंधेरा सदा तुझको छलता रहेगासदा ही दिलों मैं

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