जिंदगी के सफर में यूं ही घूमता हूं
हवाओं के संग में ही मैं झूमता हूं
वादियां जो प्रकृति की प्रफुल्लित खिली हैं
उसी में ही जीवन का रस ढूंढता हूं
कभी कम ना हो इन हवाओं की खुशबू
हवाओं में मीठा ही रस घोलता हूं
प्रकृति भी प्रफुल्लित होकर जो हस दे
उसी में जगत की खुशी देखता हूं
जीवन में संभावनाएं बहुत हैं
प्रकृति में ही जीवन बसा देखता हूं
कभी कम ना हो जाए रिश्तो की खुशबू
सदा रिश्तो में मीठा रस घोलता हूं
पनपे न खुशबू कभी स्वार्थ की अब
प्रेम की खुशबू सबमे भरा चाहता हूं
जीवन में हरदम शिखर पर मैं बैठू
यही सोच कर आसमां चूमता हू
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


