
पाती
नैन नीर में मसि मिलाकर हमने लिख दी प्रिय को पाती। भावो को लिपिबद्ध सजाकर बैरंग भेजी प्रिय को पाती।। मन पक्षी विहरत अनन्त तक

नैन नीर में मसि मिलाकर हमने लिख दी प्रिय को पाती। भावो को लिपिबद्ध सजाकर बैरंग भेजी प्रिय को पाती।। मन पक्षी विहरत अनन्त तक

एषणाओं की धरा पर पनपती मन मृग में तृष्णा। जीव को चौरासी घट पट तक घुमाती है मृगतृष्णा।। आशाओं की प्रबल सरिता प्रवाहित अविरल मनस

अपरिछिन्न अलौकिक अविरल निश्छल सुसंस्कार कहां है। सदा से विलसित रहने वाली प्रेम सुधा रसधार कहां हैं। नव मालिका कली से भंवरा कहता है, सदा

निर्जनों में भी सहज मधुमय सदा सुखवास करती। प्रेम दीप की अमर ज्योति अंतसों में प्रकाश करती।। झंझावातों के भंवर से पार करती, मुक्तिपथ सुलभा

बूढ़े बरगद के चबूतरे पर घनेरी छांव में। देखो फिर एक आज बंटवारा हुआ है गांव में।। कुछ नये सरपंच तो कुछ पुराने आये, कुछ

नव वर्ष मंगलमय हो नव वर्ष में अति हर्ष हो आनन्दवृष्टिअपार हो। मेरे हृदय में आपका अनवरत साक्षात्कार हो।। नव वर्ष ० उपवन सुगंधित हो

कुछ पंक्तियां लिखने से भर आता है मन , कुछ पंक्तियां लिखने से मिलता है बहुत अमन ।। कुछ पंक्तियां लिखने से ऐसा होता है

मैं ही इस जग रचयिता हूं, मैं पालनकर्ता भी कहलाता हूं । मैं ही परमब्रह्म,परमेश्वर, कण कण में नजर मैं आता हूं ।। मैं धरा

न कोई उत्साह है, न कोई उल्लास है । शीत के आक्रमण से, तन मन सब बेहाल है ।। ये कैसा नया साल है ये

नये साल में मस्ती करते आया लल्ला हू-हल्ला – हू हल्ला।। नये – नये सब कपड़े पहने नारी लादे ऊपर गहने और किशोरियों के क्या