जीवन के दिन चार बन्धुवर
किससे क्या तकरार बन्धुवर !
आज रू-ब-रू जी भर जी लें
कल का क्या एतबार बन्धुवर!
सुख तो एक तसव्वुर जानो
दुख ही सच्चा यार बन्धुवर!
जितनी कसक कशिश उतनी ही
अजब पहेली प्यार बन्धुवर!
मिटे दूरियाँ चलो मिलाएँ
दिल से दिल का तार बन्धुवर!
जीवन के दिन चार बन्धुवर
किससे क्या तकरार बन्धुवर !
आज रू-ब-रू जी भर जी लें
कल का क्या एतबार बन्धुवर!
सुख तो एक तसव्वुर जानो
दुख ही सच्चा यार बन्धुवर!
जितनी कसक कशिश उतनी ही
अजब पहेली प्यार बन्धुवर!
मिटे दूरियाँ चलो मिलाएँ
दिल से दिल का तार बन्धुवर!

प्राचार्य (से.नि.),हिन्दी विभाग,बी.आर.ए.बिहार विश्वविद्यालय,मुजफ्फरपुर copyright@डॉ रवीन्द्र उपाध्याय इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है| इन रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है|