
वंदन
उगते सुरज का वंदन है दुबते का भी वंदन है खुशीयों से सजा रहे हे नूतन वर्ष अभिनंदन है नया साल आया है हम नई

उगते सुरज का वंदन है दुबते का भी वंदन है खुशीयों से सजा रहे हे नूतन वर्ष अभिनंदन है नया साल आया है हम नई

मिला है जो भी मुझे अब तक मेंरी माँ की दुआओं से मैं आसमां पर घर बनाऊगा मेंरी माँ की दुआओं से है रंज नही

बेटियां किसी से कम नहीं है इस जहान में वायुवान रेल तक चलाया है भारत महान में बेटियां अपने दम पर जँहा को जीत आई

मुझसे मिले हैं जो भी वो लुटने वाले मिले हैं खुदा शहर मे तेरे बहुत सारे शिकवे गिले हैं खुदा दर पर तेरे पंडित मुल्ला

विखराता सौरभ सुगंध मैं जोर – शोर से खिला हुआ। काँटों से भी मिला हुआ।। अभिलाषा मेरी यह है, सबको सुख दे जाने को शांति

इस हाड़ कँपाती ठंडक में यदि ऐसा कुछ हो पाता। उच्छ्वासों से साँस मिले तो सारा ठंडक खो जाता।। गर्माहट तन की पा करके थोड़ा

चहुंओर दिख रहा पानी – पानी कीचड़ से गीली चूनर धानी। बच्चे कागज की नौका दौड़ाये हाल नदी की वही पुरानी।। खतरों से वह खेल

शब्द है कितना प्यारा हिंदीदेश है हिन्द भाषा मेरी हिंदीलेखन मेरी हिंदी पाठन मेरी हिंदीकहे कवि रहन सहन चलन मेरी हिंदी कहे हिंदी यहाँ जब

मुश्किल भरी राह जीवन की, आओ कुछ आसान बनाएं। कुछ तुम सीधे, कुछ हम ढीले, एकदूजे का सम्मान बढ़ाएं।। बच्चों की सीटी सा निश्छल, दे

क्या हुआ…, कुछ ख़बर नहीं ! दिल मेरा…., अब इधर नहीं ! काम तो ये तेरी निगाहों का होगा…, (क्योंकि….) बाक़ी कोई और दवा…, इधर