
हो कभी ना फासला
फासला ना हो कभी भी दिल से दिल के मेल काएहसास का हो फासला ना हो कभी उम्मीद काहम संभलते ही रहेंगे जिंदगी के मोड़

फासला ना हो कभी भी दिल से दिल के मेल काएहसास का हो फासला ना हो कभी उम्मीद काहम संभलते ही रहेंगे जिंदगी के मोड़

सुनोमेरे साथी मेरे हमगममै तुम्हे याद बहुत करती हूंतुम वहां दुश्मनों से लडते हैमै यहां तुम्हारी यादो से लडती हूंकुछ तो बताओ कब तक आओगेमेरे

कितना कुछ सिखाती हैं ज़िंदगी,कभी गिराती तो कभी उठाती है ज़िंदगी।संघर्षों से लड़ना सिखाती है ज़िंदगी, आम से खास बनाती है ज़िंदगी।कभी आशा कभी निराशा

तुम कला, स्वर की देवी हो माँ,तुम बिन यह जीव गूंगा है माँतुम बिन यह संसार,अज्ञानता से भरा है माँतुम ज्ञान की देवी हो,ज्ञान प्रदान

चलो 26 जनवरी,की करते है तैयारीसीमा पर,निगरानी करते हैकोई दुश्मन मौका,देखकर घुस ना आयेहमारी सीमा मेंऔर मचा दे ना आंतकजब मना रहे हो,देशवासी गणतंत्र दिवसचौकसी

हम दीन दुखियन के अब मैये करथिन उद्धार,ओ हंसा रे तू ले आ मैया के हमरे दुआर। न है कौनो पैसा कौड़ी न हीं है

देश भक्ति में झूमे सारे, मनाए उत्सव मिलकर।गणतंत्र दिवस हमारा, मुस्काए हम खिलकर। हाथों में तिरंगा लेकर, गीत वतन के गाए।आओ आज मिलकर, महोत्सव हम

रेगिस्तान की भूमि पर सोच रही थीं मैंदूर दूर तक कोई रहने वाला नही था वहाँपर्यटक आते व लौट जाते आखिर.. क्यों..?क्या रेत के टीले

बसंतोत्सव पर प्रकल्प मेरा संकल्प मेरा…अपनी लेखनी से शब्द रूप मै दे पाउँ…नव प्रभात नव संचार मिलेगाखुशियों का उपहार मिलेगाकलम में मेरी धार रहेगीनित नई

लो बसंत आयामेरा प्यारा बसंतपेड़ो में नव चेतन लानेलो आ गया वसंतपेड़ो के रूखे अधरों परहरित क्रांति लेकर आयानव सृजन को ततपर प्रकृतिफूलो को खिलाने