
गुरु का व्यक्तित्व
सूर्य, चन्द्र और सितारें जिनके मुख मण्डल को आलोकित किया करते हैं। जिन्हें सत्कर्म करने को उनके सात्विक विचार आन्दोलित किया करते हैं। जिनके आँचल

सूर्य, चन्द्र और सितारें जिनके मुख मण्डल को आलोकित किया करते हैं। जिन्हें सत्कर्म करने को उनके सात्विक विचार आन्दोलित किया करते हैं। जिनके आँचल

देखकर चेहरा ये तेरा, कहता है अब मन ये मेरा तु क्यों है परेशान। फूल आशा के जो हैं खिलते, यूँ ही नहीं हमको हैं

मेरी प्रेमिका पुष्प की मुस्कान वो हैं। परिंदों के पैरों की उडान वो हैं। जिसको जीवन भर जीया मैंने , पाऊँगा जिसको अरमान वो है।

आनंद ही आनंद मिलता है गोपाल तेरे चरणों में दुनियाँ को देखा मैंने ना तुझको मैंने पाया है ये दुनिया तेरी है प्यारे दुनिया में

बस एक ही तमन्ना दिल में प्यार मिले तेरे आँचल का कुछ यूँ छिप जाऊँ कि पता न चले तेरे आँचल का नशीली आँखे तेरी

गुलाब की कली के समान उत्पन्न होती है पुत्री और खिले फूल की भाँति महकती है पुत्री उपवन में सभी को आकर्षित करती है पुत्री

आज भूल बैठे हैं हम मूल्य इस दिन का। इसे लूटो उसे लूटो क्रम नित दिन का। राष्ट्र चिंतन हित में कोई लगता नहीं, श्वेत

तेरे बिना इस जिंदगी में, रंग कोई आता नहीं है। छोड कर कभी फूल को, भौंरा कहीं जाता नहीं है॥ महफिल लोगों की बढ रही

घर का दीपक छीन हमें,माटी का ये घर देते हैं। न्याय हमसे दूरा है अब तक,अहसान हम पर धर देते हैं। घर का दीपक… नेताओं

अश्क छिपाकर हँस देते हैं। गम छिपाकर हँस देते हैं। प्यार करना उनसे सीखो हमको नित धोख देते हैं अंतिम क्षण है ये जीवन का