
आंतरिक शक्ति
बाहर से टूट भले जाओ पर अंदर से मजबूत रहोबल पौरूष कुछ घट जाए पर दिल इच्छा बलवान रहोटूट गये जो अंदर से तो बचा

बाहर से टूट भले जाओ पर अंदर से मजबूत रहोबल पौरूष कुछ घट जाए पर दिल इच्छा बलवान रहोटूट गये जो अंदर से तो बचा

डाल में बैठी चार गौरैया मंथन करती विषय अनेक कहां जाएं राहें तकें अनेक कहीं और है उनको जाना सारा जग है जाना पहचाना मंथन

गन्ना कै रस आवत होई डेउढी का महकावत होई लिहा गिलासी छोटका बबुआ गझिनै दहिउ मिलावत होई सुधि चैती बइसाख कै आवै दांत लड़कपन कै

गंउआ के खुशी खातिर डिउहार का मनाइन जब जब परी बिपतिया तब तब दिया जराइन अम्मा कै अपने जेतना बखान करी कम है उनहीं तौ

हमारे भारत में, गलत को गलत कहना भी,सबसे बड़ा पाप है, अपराध है। क्यों के कई बार प्रमाण से ज्यादा,अपने ज्ञान से ज्यादा,समझ, अपनी शिक्षा

मैं तो गांवो में ही रह कर गांव से हरदम प्यार कियाप्रकृति प्रदत हवा जो मिलती उसी में हरदम सांस लियानहीं तीव्रतम चाल मै देखी

मुझे गांव में रहने दो अपने में ही सिमटने दोछेड़ो ना मुझको तुम सब मिल गुमनाम सा जीवन जीने दोमुझे गांव में रहने दोगुमनामी का

आँसुओं से निर्झर अश्रु श्रँखला निर्बाध बह चली मानों दोनो के मध्य संधि अनुबंध करार बना चली अविरल अश्रु धारा मानों तटीबन्ध तोड़ बस चली

देखा मैंने सागर को जब तेरे इन दो नैनों मेंभाव मेरा तो भावुक होकर डूब गया तेरे नैनों मेंसागर की क्या गहराई होगी जितनी तेरे

मेरे एहसास, मेरे शब्द,मेरी धड़कन, मेरे नब्ज।मेरा अपना, मेरा सपना,मेरी उम्मीदें, मेरी ख्वाहिशें।मेरा वजुद, मेरा सुकून,मेरी खुशी, मेरा जूनून।मेरा रब, मेरी प्रार्थना,मेरी दुआ, मेरा आसमां।मेरी