पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

रिश्तें

जब होंठ पर हँसी आती तो खिलते हैं रिश्तें, अपनो से अकारण बिछड़ने से डरते हैं रिश्तें। दुनियावी लोग सभी जब यहाँ छोड़ जाते है,

विस्तार से पढ़ें »

हैवानियत

ये इश्क का जुनून, नफरत में बदलता जा रहा है । पहले पैंतीस टुकड़े थे, अब कोई पचास बता रहा है ।। अब इंसान में

विस्तार से पढ़ें »
दोहा

दोहा

अपनी अपनी सब यहाँ, ले आये तकदीर। दर्द समझ तूं गैर का, बन जा बुद्ध-कबीर।।

विस्तार से पढ़ें »
गीत

भाव दिलों का जोड़ लो

दौर मुसीबत कर्मों का फलईश्वर पर ही छोड़ दोउम्मीद नहीं संसार सेकेवल ईश्वर से ही जोड़ लोतेरे हर प्रश्नों का उत्तरखुद से ही मिल जाएगाकरके

विस्तार से पढ़ें »
कविता

कैसे सुधरेंगे हालात

मजहब के रंग में रंगा हुआ जो पूरा देश है आजतो कैसे सुधरेगे हालातलूट के अपने देश की दौलत खुद बनते धनवानतो कैसे सुधरेंगे हालातसब्र

विस्तार से पढ़ें »
कविता

पालना है प्रकृति का सभी के लिए

है प्रकृति का संवरना तो सबके लिएलाभदायक है पूरे जगत के लिएआओ सिंगार मिलकर प्रकृति का करेंबिखरी आभा प्रकृति की तो सबके लिएचांदनी रात शीतल

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!