दौर मुसीबत कर्मों का फल
ईश्वर पर ही छोड़ दो
उम्मीद नहीं संसार से
केवल ईश्वर से ही जोड़ लो
तेरे हर प्रश्नों का उत्तर
खुद से ही मिल जाएगा
करके भरोसा कर्म पे अपने
भाव दिलों का तोल लो
दिख जाएगा कर्मों का फल
कर्म को अपने देख लो
जीवन का रस मीठा होगा
कर्म की मिस्री घोल लो
जीवन में कटुता ना आएगी
बातों में मिश्री घोल लो
मन हो जाए जिससे निर्मल
ऐसी वाणी बोल लो
प्रेम का बीज अंकुरित होगा
शुष्क ह्रिदय के खेत में
नफरत छोड़कर प्रेम का जब
भाव दिलों से जोड़ लो
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


