त्याग प्रेम दिल भरा तो सब ही अपने हो गए
चल के कर्म पथ पे हम इतिहास अपना गढ गये
हौसले बढ़ाके अपने हम शिखर पे चढ़ गए
धैर्य से डटे हुए उम्मीद सबके बन गए
सत्य पथ पे चलके राह हम सुगम बना गए
अर्थ नगर छोड़कर के भावनगर आ गए
कहते किस्मतों पे ही आज दुनिया चल रही
हम तो कहते मेहनतों से आज हम सब बढ़ गए
जिंदगी जवानी बनके रोज धटती ही गई
मुझको तो खुशियां हमेशा पर्त दर मिलती गई
धर्म-कर्म अपना करके फर्ज हम निभा रहे
आत्म कौशल से कवित्त सर्जना निभा रहे
प्रेम दिल में जब उगा तो दिल उजाला कर गया
उम्मीद खुशियों की जगी जीवन सवेरा हो गया
कोई शिकवा ना शिकायत ना गिला ही रह गई
त्याग प्रेम में ही डूब जिंदगी सवर गई
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


