पद्य-रचनाएँ

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कविता

नव जीवन उत्सर्जन

करती उद्बोधन प्रकृति मानोजगा रही मानव को चिरनिंद्रा सेदेखो कैसे नव उत्सर्जन फिर से भरता प्राणन हो सुसुप्त ए वृक्ष तू हो फिर तैयारसत्य यही

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कविता

सुनो ना

सुनों..ना तुमबहुत बातें करती हूँ मैंअक्सर तुमसेन जाने क्योंसामने होने पर बोलनहीं पाती हूँपर अपनी लेखनी सेअपनी कविताओं मेंबात कर लेती हूँअपने मन केसारे भावओर

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कविता

कफ़न तिरंगा

मैं नही किसी से बैर भाव रखती हूँबस देश के काम आ सकूँ यही भाव रखती हूँदेश की मिट्टी माथे से लगाकर फक्र महसूस करती

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कविता

शिव : एक अनुसरणीय जीवन

भोले भंडारी शिव सत्य सन्यासी, सदा रहे ध्यान मगन शम्भू अविनाशी, भूत-प्रेत गण शिव संग चलत हैं, दीन हीन पद स्वारथ कर बनाते विश्वासी,  

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गीत

भजन-शिवमय जीवन

शिवमय जीवनजीवन का अनमोल क्षण,शव नहीं शिव मय हो।मन से निकले प्यारा बोल,जिसमे सुंदर सा लय हो।मानवता सब में झलके,किसी से न कभी भय हो।विवेक

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कविता

आया है बसंत

आया है बसंतमन में लाया है उमंग ।चलो खुशी से नाचे हमदेखो नाच रहें है भुजंग ।। कोयल की आवाजमन में मिठास भर देती है

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कविता

महादेव भोले भंडारी

श्री हरी श्री हरीमहादेव भोले भंडारीजो भोले का नाम जपेउसकी सारी विपदा टारीतुझसे राम तुझसे ही नारायणग्रंथ पवित्र करें हमेंतेरी कृपा बरसे त्रिपुरारीसारा जग तेरे

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कविता

कुर्बान-ए-आजादी

ये आजादी नहीं हमने,कोई उपहार पाई है।हमारे राष्ट्र भक्तो ने,लड़ी कितनी लड़ाई है।।न जाने लाल कितने,इस जगत जननी ने हैं खोए।तभी जाके सभी अवनी में,हम

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