पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

यह युग छलिया ,प्रपंचों का है

राजनीति के राज विशेषज्ञतुम्हें कोई काम नहीं आएगासावधान! खुद को तैयार रखोयह युग छलिया , प्रपंचो का है । इस युग में योग्यता का मोल

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कविता

बखरी(अवधी कविता)

तावा मूंदा तव बहुत गवा बखरी अस आज उजार परी दमदार परोसी नाय भये अपनै कमजोर देवार परी अस रहा परानिम् मेल जोल कहियौ न

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कविता

सुखद भावो का यहा निर्माण हो

जिसने जीवन को संवारा है मेरेवो ही जीवन का मेरे हकदार होगम में भी मैं मुस्कुरा कर के जियूऐसा ही मेरा यहां किरदार होकर्म से

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पद्य-रचनाएँ

झूम रहा संसार

लाल गुलाबी रंग है, झूम रहा संसार सूरज की किरण खुशियों की बहार चाँद की चांदनी अपनों का त्योहार शुभ हो आप सबको ये रंगों

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कविता

आज महफिल दिलों की सजा लीजिए

आज महफिल दिलों की सजा लीजिएअपने दिल की उदासी मिटा दीजिएकोई गम ना रहे अब किसी बात काआज जी भर के तुम मुस्कुरा लीजिएकोई साथी

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