
रिश्तें
जब होंठ पर हँसी आती तो खिलते हैं रिश्तें, अपनो से अकारण बिछड़ने से डरते हैं रिश्तें। दुनियावी लोग सभी जब यहाँ छोड़ जाते है,

जब होंठ पर हँसी आती तो खिलते हैं रिश्तें, अपनो से अकारण बिछड़ने से डरते हैं रिश्तें। दुनियावी लोग सभी जब यहाँ छोड़ जाते है,
ये इश्क का जुनून, नफरत में बदलता जा रहा है । पहले पैंतीस टुकड़े थे, अब कोई पचास बता रहा है ।। अब इंसान में

दौर मुसीबत कर्मों का फलईश्वर पर ही छोड़ दोउम्मीद नहीं संसार सेकेवल ईश्वर से ही जोड़ लोतेरे हर प्रश्नों का उत्तरखुद से ही मिल जाएगाकरके

जो मेरे सामने आओ तो दिल की बात हो तुमसेभरा जो प्यार है दिल मे कभी इजहार हो तुमसेअकेलेपन का जीवन भी कोई जीवन नहीं

मजहब के रंग में रंगा हुआ जो पूरा देश है आजतो कैसे सुधरेगे हालातलूट के अपने देश की दौलत खुद बनते धनवानतो कैसे सुधरेंगे हालातसब्र

है प्रकृति का संवरना तो सबके लिएलाभदायक है पूरे जगत के लिएआओ सिंगार मिलकर प्रकृति का करेंबिखरी आभा प्रकृति की तो सबके लिएचांदनी रात शीतल

जो राह तेरे ही दर पे जाए उसी पे हरदम कदम रखूंगासदा ही जीवन बना के निर्मल पुष्प कमल सा खिला करूगाकभी चुभूगा न शूल

त्याग प्रेम दिल भरा तो सब ही अपने हो गएचल के कर्म पथ पे हम इतिहास अपना गढ गयेहौसले बढ़ाके अपने हम शिखर पे चढ़

अब तो चेहरे पर आफताब नहीं दिखता हैसुर्ख गालों पर अब गुलाब नहीं दिखता हैमन की कुंठा में ही सब लोग सने बैठे हैंसब में