पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

प्रेम दीप

निर्जनों में भी सहज मधुमय सदा सुखवास करती। प्रेम दीप की अमर ज्योति अंतसों में प्रकाश करती।। झंझावातों के भंवर से पार करती, मुक्तिपथ सुलभा

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कविता

बंटवारा

बूढ़े बरगद के चबूतरे पर घनेरी छांव में। देखो फिर एक आज बंटवारा हुआ है गांव में।। कुछ नये सरपंच तो कुछ पुराने आये, कुछ

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गज़ल

गज़ल-अक्सर मुझे आज़माने की खातिर

अक्सर मुझे आज़माने की खातिर। वो जलता रहा खुद जलाने की खातिर।। मुहब्बत में आये तो इक बात समझी, ये आंखें हैं आंसू बहाने की

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कविता

नव वर्ष मंगलमय हो

नव वर्ष मंगलमय हो नव वर्ष में अति हर्ष हो आनन्दवृष्टिअपार हो। मेरे हृदय में आपका अनवरत साक्षात्कार हो।। नव वर्ष ० उपवन सुगंधित हो

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कविता

कुछ पंक्तियां

कुछ पंक्तियां लिखने से भर आता है मन , कुछ पंक्तियां लिखने से  मिलता है बहुत अमन ।। कुछ पंक्तियां लिखने से  ऐसा होता है

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