पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

पद्य-रचनाएँ

टूटे मन के भ्रम

टूटे मन के भ्रम सभी,हुआ नहीं विश्वास, प्रण कर ले अब तो मना,नहीं किसी की आस। नहीं किसी की आस,भरोसा खुद पर करना, रिश्ते तो

विस्तार से पढ़ें »
गज़ल

दिल ने तुम्हें पुकारा

दिल ने तुम्हें पुकारा है सरकारे-दो जहां आओ मिरी मदद को ए मुख़्तारे-दो जहां मँझधार में किनारा दिया आपने सदा आये हो बनके आप ही

विस्तार से पढ़ें »
कविता

जबसे हुए हैं शिक्षित

जबसे हुए हैं शिक्षित, ताजा विचार आयापरिपाटिया भी हमको, दिखने लगी छलावामाया का जाल ऐसा, कोई नहीं किसी काहर आदमी अकेला, हर चेहरा अजनबी साबाहर

विस्तार से पढ़ें »
गज़ल

अब तैयारी है

हिज्रे तन्हाई शब गुजारी है। आ भी जाओ के अब तैयारी है। शुक्रिया कहूं तो मैं कैसै कहूं, अभी उनकी बहुत उधारी है। दिल तो

विस्तार से पढ़ें »
कविता

एक दिन

करले तू इस जगत में सद्व्यवहार एक दिन। जाना पड़ेगा छोड़कर संसार एक दिन।। विषयादि त्रिगुण फंद अविद्या विकार में, स्व ढका मन बुद्धि चित्त

विस्तार से पढ़ें »
गीत

और जीवन

ऐषणाओं के सघन घन और जीवन। आनुषांगिक भी न हो पाया अकिंचन और जीवन। शांत पानी इतने कंकड़। अंधड़ों की पकड़ में जड़, आत्मा ह्रासित

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!