कविता

Category: कविता

कविता

मर रहा होता है

आपके अंदर का मर्द मर रहा होता है ,जब कोई मनचला,किसी लड़की का रस्ता रोक,किसी लड़की को,दरंदगी का छूरा भोंक ,मुस्कुरा रहा होता है,और एक

विस्तार से पढ़ें »
कविता

भगवान बन जाना

कितना आसान सा है इन्सान बन जाना,बेवजह क्यों चाहते हो भगवान बन जाना llबस थोड़ा ढालना है खुद में इंसानियत के गुणफिर तुम स्वतः देखना

विस्तार से पढ़ें »
कविता

बाल दिवस

कुछ नन्हें दीपक सूरज को रस्ता दिखलाते हैं,कुछ जुगनू अपनी मेहनत से आलोकित हो जाते हैंकुछ हाथों की कलम कभी भी लिखती नहीं धरा पर,कुछ

विस्तार से पढ़ें »
कविता

सत्य

जिंदगी से जल्द जो हार मान जाते है सुख की दहलीज़ से वो पीछे छूट जाते है। रेत में मिल जाती तब उनकी खुशियाँ उठ

विस्तार से पढ़ें »
कविता

ज्ञान

ज्ञान जहाँ से मिले छोड़ना मत स्वयं को इस राह पर कभी रोकना मत यू चौंकते क्यों हो बात सही है किताब और दुनिया देती

विस्तार से पढ़ें »
कविता

अपनों से

निज अपनों से पिस रहे,हम तो अब हर रोज, प्रेम यहां मिलता नहीं,लाखों कर लें खोज। लाखों कर लें खोज, न कोई प्रेम निभाता भाई

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!