
केवट रीझा रहा है
धरा है, जिनकी रचना, उन्हीं को, केवट रीझा रहा है।जिनकी करूँ ना, गंगा मैया, उन्हीं का पद रज, चुरा रहा है इंग्लिश अपनी राम की

धरा है, जिनकी रचना, उन्हीं को, केवट रीझा रहा है।जिनकी करूँ ना, गंगा मैया, उन्हीं का पद रज, चुरा रहा है इंग्लिश अपनी राम की

Know the mother, as much as one can,But remember the pain,Of the night, by scorpion,She is bearing the pain,May be, for some reasons,Let come the

माँ मैथिली गुरु, ख़गेश्वर नाथ,वाली जुबानी है,कोरे, काग़ज़, पे लिख लो,शाँति यही बस आनी है,विश्वविद्यालय बिहार, नालंदा,खुली कहानी है। धीश देखें, जग धीश देखें,पीने न

ट्विन टावर यदि बोल पाता तो कहता-पलक झपकते ही मुझे जमींदोज करने वालों,कल तुम भी शामिल थे मुझे बनाने में।मुझे ये तो नहीं पता कि

ईमानदार होने के मतलब अप्रयास अज्ञात हजार शत्रु उत्पन्न करना। ईमानदार होने का अर्थ अपने परिश्रम और ईश्वर के न्याय पर पूर्ण विश्वास रखना। ईमानदार

ये जीत का जश्न जलता रहे भले हमारी हार हो सिर्फ हमीं से प्यार हो।। जल रहे हैं लोग यहाँ, देख तेरी स्वच्छंदता को रोक

मन शांत लिए ही स्थिर सी आज बैठ गई थी मानों एकाग्रता में सोच पाऊँगी अपने को व अपने भविष्य को झांक पाऊँगी स्वयं में,

विटप बन मैं तुझे , सुख भरी आस दूँ। आ तुझे अपनी कोमल कोमल, डालियों से बाहों के हार दूँ। अपने सारे पत्तो से सारा

चिराग आंधियों में अब जलाएगा कौन?, गिरते हुए लोगों को अब उठाएगा कौन?, सब लोग अपनी अपनी राह चल दिए, भटके हुए लोगों को राह

भरे सम्मान गरिमा से,हिर्दय गंगा सा पावन थानिराले जगत से, दिल में, परम प्रिय प्रेम पलता थासदा ओठो पे धर मुस्कान, हृदय को जीत लेते