कविता

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सन् 1857 महाक्रांति के योद्धा, हरियाणा के राजनायक राजा राव तुलाराम

धरा धरणि हिल गए निशाने गगन की ओट लगाए थे स्वतंत्रता के शूरवीर उस महायुद्ध में आए थे रखकर जान हथेली पर दुश्मन पर भृकुटि

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अंग्रेजिक बस एक हव्वा हय (अवधी कविता)

सबके मन मा एक ठाउर अंग्रेजिक बस हव्वा हय।सब भाषा हय बगुला जस अंग्रेजी एक कौव्वा हय।।अंग्रेजी जानय वाले मनाई नेपालिन से हय भेद करत।अंग्रेजी

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वतन की मिट्टी

शत्रु को मार के सीमा पर,खुद के भी होश खोया होगा । वतन की मिट्टी चूम के सैनिक,मृत्यु की गोद में सोया होगा ।। मां

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मां की गोद

मां की गोद है सबसे प्यारी, इसकी तो है बात निराली । इसका अंचल कवज के जैसे, दुआ से मिटती विपदा सारी ।। माता यशोदा

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आजादी की कीमत

खून के बदले आजादी की, कीमत सबने चुकाई थी । हंसते हुए सूली पे चढ़े, सीने पर गोली खाई थी ।। जलियांवाले बाग में, रक्त

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