
कोई तो ऐसी रैन मिले
प्रियतम मोरे आन मिलो, इस दिल को कुछ तो चैन मिले। दरस तुम्हारे मैं पा जाऊँ कोई तो ऐसी रैन मिले। छलिया बनकर के जीवन

प्रियतम मोरे आन मिलो, इस दिल को कुछ तो चैन मिले। दरस तुम्हारे मैं पा जाऊँ कोई तो ऐसी रैन मिले। छलिया बनकर के जीवन

उठव देश कय नौजवान अब किस्मत लेव अजमाय।करव काम विश्वास से अपन भाग्य लेव अजमाय।।काम धर्म हय काम हय पुजा सबसे काम महान।काम करय जो

जन्म से लेकर मृत्यु तक दु:ख भोगे हैं नारी ने जन्म लेती न्यास बनकर मार देते हक समझकर छेड देते काम समझकर छोड देते चाम

बचपन के दिन बीत चले घट आनंद के रीत चले उड चल पंछी गगन में अकेला ताल परों की तेरी हो यात्रा का जब गीत

मैं रो रोकर के थक गया हूँ मैं चल चलकर के थक गया हूँ। मैं तो बहता पानी था, तेरे दर पर आकर रुक गया

जीवन तुम बिन सूना- सूना है। संगीत तुम बिन फीका है। तुम प्रेरणा हो मेरे जीवन की, ठोकर खाकर सीखा है। मैं निर्मम हो गया

कुछ जिम्मेदारियों की चादर ओढ़े , चलो गणतंत्र मनाते हैं ।दिल को कर इन्द्रधनुषी , चलो तिरंगा ध्वज फैराते हैं ।।भूल न जाएँ ताकत अपनी,

मेघनाद उदास बहुत है,रघुपति से जीत न पाऊंगा, पिता वचन स्वीकार मुझे,लड़ते लड़ते मर जाऊंगा, इंद्र न मुझसे जीत सका,फिर तपस्वी कैसे जीत रहे, ये

जीवन के सुंदर सपनों की बात बताने आ जाना रात कभी जब बीते कोमल लाली बनकर छा जाना मैंने तुमसे जो भी पाया वो श्रद्धा

डूबते सूरज को देख आज कितनी बार डूबी मैं तेरी यादों में कहीं एक आस सी लिए मन में सोचती रही कि अभ्युदय होगा पुनः