कविता

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हो कभी ना फासला

फासला ना हो कभी भी दिल से दिल के मेल काएहसास का हो फासला ना हो कभी उम्मीद काहम संभलते ही रहेंगे जिंदगी के मोड़

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फौजी की पत्नी अपने फौजी से कहती है

सुनोमेरे साथी मेरे हमगममै तुम्हे याद बहुत करती हूंतुम वहां दुश्मनों से लडते हैमै यहां तुम्हारी यादो से लडती हूंकुछ तो बताओ कब तक आओगेमेरे

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ज़िंदगी

कितना कुछ सिखाती हैं ज़िंदगी,कभी गिराती तो कभी उठाती है ज़िंदगी।संघर्षों से लड़ना सिखाती है ज़िंदगी, आम से खास बनाती है ज़िंदगी।कभी आशा कभी निराशा

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माँ शारदे वन्दना

तुम कला, स्वर की देवी हो माँ,तुम बिन यह जीव गूंगा है माँतुम बिन यह संसार,अज्ञानता से भरा है माँतुम ज्ञान की देवी हो,ज्ञान प्रदान

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26 जनवरी की तैयारी

चलो 26 जनवरी,की करते है तैयारीसीमा पर,निगरानी करते हैकोई दुश्मन मौका,देखकर घुस ना आयेहमारी सीमा मेंऔर मचा दे ना आंतकजब मना रहे हो,देशवासी गणतंत्र दिवसचौकसी

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गणतंत्र दिवस हमारा

देश भक्ति में झूमे सारे, मनाए उत्सव मिलकर।गणतंत्र दिवस हमारा, मुस्काए हम खिलकर। हाथों में तिरंगा लेकर, गीत वतन के गाए।आओ आज मिलकर, महोत्सव हम

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बसंतोत्सव पर

बसंतोत्सव पर प्रकल्प मेरा संकल्प मेरा…अपनी लेखनी से शब्द रूप मै दे पाउँ…नव प्रभात नव संचार मिलेगाखुशियों का उपहार मिलेगाकलम में मेरी धार रहेगीनित नई

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लो बसंत आया

लो बसंत आयामेरा प्यारा बसंतपेड़ो में नव चेतन लानेलो आ गया वसंतपेड़ो के रूखे अधरों परहरित क्रांति लेकर आयानव सृजन को ततपर प्रकृतिफूलो को खिलाने

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