
अश्क छिपाकर हँस देते हैं
अश्क छिपाकर हँस देते हैं। गम छिपाकर हँस देते हैं। प्यार करना उनसे सीखो हमको नित धोख देते हैं अंतिम क्षण है ये जीवन का

अश्क छिपाकर हँस देते हैं। गम छिपाकर हँस देते हैं। प्यार करना उनसे सीखो हमको नित धोख देते हैं अंतिम क्षण है ये जीवन का

ऐसे गये वो गोकुल से गय्यों ने भी चरना छोड दिया। मग निहारती आँखों की पलकों ने भी झपकना छोड दिया। पावस आती है तुम

अगर एक दिन तुफान आयासभी लोग परेशान होंगेकोई बचायेगा खुद कोतो कोई अपनी गृहस्थी कोकुछ लोग तो भगवान का नाम लेंगेताकि टल जाए आया हुआ

इश्क का भ्रमण भीबहुत लम्बा हो गया हैअधिकतर लोगो कोगुम हो जाना ही होता हैअपनी मोहब्बत मेंकभी यह न जान पातेकी आगे और कितना जाना

आ गया मधुमास फिर से आ गया शाख पर कोपल उगी फिर सुनी पदचाप जब मधुमास की डाल मेहंदी कि कहीं शरमा गई है सुगंधित

स्त्री खड़ी सजी सँवरी सौम्य लगी,दिल मे उतरी तो वो उसका प्रेमी कहलाया फिर बढ़े आगे तो घर में वो राह निहारती मिली पत्नी कहलाई

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

जिंदगी के सफर में यूं ही घूमता हूंहवाओं के संग में ही मैं झूमता हूंवादियां जो प्रकृति की प्रफुल्लित खिली हैंउसी में ही जीवन का

पतझड़ सा आगन था मेराआज खुशी की छाया हैआज सुनहरे से जीवन मेमौसम बसंत का आया हैखेतों में लहराए बालीपुष्पों की कलियां खिली हुईसूने सूने

कभी उठती थी ओ पलके,कभी ओ झुक भी जाती थीकरूं मैं याद जब उनको,मुझे तड़पा भी जाती थी कभी सोचू जो ओ बातेंदिलो मे आह