
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता:प्रणता:स्म ताम् ॥” हे माँ! तुम्हारे दर पे आए ज्ञान का वरदान दो।। कर दो सारे

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता:प्रणता:स्म ताम् ॥” हे माँ! तुम्हारे दर पे आए ज्ञान का वरदान दो।। कर दो सारे

जीवन चलता है निर्बाध अविरल गति से अपनी लय को लिए उम्र के एक पड़ाव पर आकर लगता हैं क्या किया हमने और आये क्या

मैंने देखा है.. तुम में स्वयं को तुम्हारी आंखों में स्वयं का विलय आंसुओ से सींचती अपने को कुछ तस्वीरे भी बया करती है मैंने

फुदकती छोटी सी मेरी चिड़िया आज न जाने कहाँ क्यो रूठी हैं मुझसे..? क्यो चुप हैं बोल आज तो..? सुबह सुबह दाना चुनती थी फुदक

मैं स्त्री पूरा जीवन किया समर्पित फिर क्यों न लटकी मेरे नाम की तख़्ती न माँ के घर पर न तथाकथित घर हम स्त्रियाँ घर

आगे बढिगा ढेरि जबाना अंगुरी आजी बाबक् छूट अम्मा बप्पक कहेम चलत हैं कहां बताओ बिटिया पूत अंगरेजी कै यहै पढाई परमपरा का लइगै लूट

कवन, बिधि करू, मुकुन्द हम, तोड़ बड़ाई,कबहुं, प्रेम, कभी करू, लड़ाई,तोड़ प्रीति, सुनु हरजाई,मोरे मन ही मन मे, हेराई।। अब, करहु सनाथ, राम रघुराई।हे, अ

हम ने दमन, बचाने, की बड़ी, कोशिशें की मुकुन्द,पर, उन्होंने दामन, न छोड़ा, कभी चलते चलते,वो जो, शामिल रहे, मेरे मरने, की ज़िद में,मुकुन्द, ख़ुदा

दुनिया में नाम वतन का रहेगा रहें ना रहें हम जतन ये रहेगा करके जाऊं कुछ ऐसा जमाना नाम जपेगा वीर सपूत दुनिया में रहेगा

माँ मुझे बोझ मत समझो मैं भी अंश तुम्हारा हूँ अजन्मा ही मत मारो मुझको मैं भी खून तुम्हारा हूँ माँ हो मेरी फिर साथ