
रोटियाँ
लोरियाँ सुनने की इच्छा जागृत जब भी हुई,तब हमें रोटियों की भूख सताती रही।हमें चॉंद दिखाकर लोरियाँ मत सुनाओ,हमें आवश्यकता है सुरज ढलते ही रोटियों

लोरियाँ सुनने की इच्छा जागृत जब भी हुई,तब हमें रोटियों की भूख सताती रही।हमें चॉंद दिखाकर लोरियाँ मत सुनाओ,हमें आवश्यकता है सुरज ढलते ही रोटियों

यदि तुम्हें बीज मेंवृक्ष दिखाई देता है,तो तुम्हें चलते रहना चाहिए। तुम्हारे रास्ते में देहशंकु की भांतिकुछ ऐसी बाधाएं भी आएगी,जो तुम्हें विचलित कर देगी,मगर

वो प्रेम जिस में निस्वार्थ का भाव हो, दया हो, करुणा हो, जीवन के लिए उत्शाह हो। वो प्रेम जो ज़िन्दगी देना सिखाती हो, लोगों

एक ऐसा घर बन जाए मेराजिसमें सब का ठिकाना होएक तरफ दुकान हो मेरीसामने मेरे शिवाला होप्रेम मिले सबका ही मुझकोअहंकार ना उपजा होकभी बंद

सही समझ सही भाव पर, करना होगा काम । मानव जीवन है सुखी, प्रकृति के साथ । इच्छा विचार आशा ये, सब है क्रियाएं ।

भरत से पड़ा नाम भारत का, हम उस भारत के रखवाले हैं। अपनी पर जो यदि आ जाए, तो हम इतिहास बदलने वाले है।। हम

देखो नित उड़ान अब,भरती है बेटियां, कहां किसी के रोके, रुकती है बेटियां । अब तो अम्बर भी छोटा, लगने लगा है, कुछ इस तरह

कलम हमारी बोली कविवर, मुझे ये क्यूं नही बताते हो । एक वर्ष में तीन दिवस क्यूं ? तुम देशभक्ति जगाते हो ।। इस वतन

कतरा _कतरा रक्त बहाया, तन मन मातृ भूमि पर वार दिया । धन्य धन्य आजादी के दीवाने, ऐसे जन्मभूमि से प्यार किया ।। मंगल पांडे

आया बसंत झूम कर देखो, तरु नव पलल्व लगे है पाने । दिनकर को फिर तेज मिल गया, अब शीत को लगे है हराने ।।