लोरियाँ सुनने की इच्छा जागृत जब भी हुई,
तब हमें रोटियों की भूख सताती रही।
हमें चॉंद दिखाकर लोरियाँ मत सुनाओ,
हमें आवश्यकता है सुरज ढलते ही रोटियों की।
हमें चॉंद की शीतलता में लोरी नहीं सुनना,
हम सुरज की गर्मी में रोटियां पकाने की कोशिश करेंगे।
इस जन्म में तो शायद ही हम लोरियाँ सुन पाएंगे,
इस जन्म में रोटियां अगले जन्म में लोरियाँ ।
रचनाकार
Author

गुलशन पंवार का जन्म मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के आंबा गांव में 22, अक्टूबर 2001 को हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव और ननिहाल में हुई। इन्होंने बी.ए.(अंग्रेजी साहित्य) से किया। इनकी रचनाएं पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। युवा कवि और शायर ग़ज़ल और कविताएं लिखते हैं। Copyright@गुलशन पंवार/इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


