कविता

Category: कविता

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यह युग छलिया ,प्रपंचों का है

राजनीति के राज विशेषज्ञतुम्हें कोई काम नहीं आएगासावधान! खुद को तैयार रखोयह युग छलिया , प्रपंचो का है । इस युग में योग्यता का मोल

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बखरी(अवधी कविता)

तावा मूंदा तव बहुत गवा बखरी अस आज उजार परी दमदार परोसी नाय भये अपनै कमजोर देवार परी अस रहा परानिम् मेल जोल कहियौ न

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सुखद भावो का यहा निर्माण हो

जिसने जीवन को संवारा है मेरेवो ही जीवन का मेरे हकदार होगम में भी मैं मुस्कुरा कर के जियूऐसा ही मेरा यहां किरदार होकर्म से

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आज महफिल दिलों की सजा लीजिए

आज महफिल दिलों की सजा लीजिएअपने दिल की उदासी मिटा दीजिएकोई गम ना रहे अब किसी बात काआज जी भर के तुम मुस्कुरा लीजिएकोई साथी

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फिर याद आई गांव की खुशबू

फिर याद आई गांव की खुशबूमन करता मैं लौट जाऊंतनाव भरी जिंदगी सेहमेशा के लिए मुक्ति पाऊं। भागदौड़ की जिंदगी है शहरों मेंविकास का तनाव

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