डॉ दिवाकर चौधरी
डॉ दिवाकर चौधरी

डॉ दिवाकर चौधरी

कल्याणी प्रतिभा हो मेरी, मधुर वर्ण-विन्यास न केवल||Copyright@डॉ दिवाकर चौधरी इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

शिक्षा शास्त्र (सेट-2)

(CTET & UGC-NET हेतु उपयोगी ) 1. ‘मन्दितमना’ बालकों की शिक्षा हेतु कौन-सा उपागमउपयुक्त कहा जा सकता है? 2. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य

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पर्यावरण और नेपाली का काव्य

                           गोपाल सिंह ‘नेपाली’ उत्तर छायावाद के प्रतिनिधि कवि हैं | वे प्रेम,प्रकृति और राष्ट्रीयता की गीतिकाव्यधारा के विशिष्ट हस्ताक्षर हैं | इन्होंने आलोचकीय

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अमृत

जहां जो भी उपलब्ध है, वहां वही अमृत। जैसे विस्तृत जगत में, सकल चराचर जीव ।।

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माँ

शोणित था माँ का दूध नहीं था तुम्हें गर्भ में जो थी पिलाती लाने को दुनिया में तुमको सहा था माँ ने दर्द अपरिमित आये

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खो गए हैं

खो गए हैं स्वार्थान्धकार में मानव की मानवता,पुरुषों का पुरुषार्थ औरत की पवित्रता,पापी का पश्चाताप प्रेम भाई के प्रति भाई का, पिता-प्रेम मानव का मानव-मात्र

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सूरज

देखो उस अविश्रांत पथिक को उज्ज्वल नभ के स्वर्ण-पुरुष को खुद जल,जग ज्योतिर्मय चलता पथ पर धीरे-धीरे नहीं किसी का है गुलाम निष्काम जगत की

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निर्झर

देखो उस नदी को,निर्झर को नदी की नाद कल-कल, छल-छल निर्झर की झर-झर, झहर-झहर यह हास नहीं नदी-निर्झर की जीवन की भी यह शाश्वत है

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जीवन की ओर

धारा चल जीवन की ओर जीवन की किसी मरुभूमि को कर सिंचित,चल जग की ओर धरा के उर्वर कितने कोने, मरू,नागफनी उगे परे हुए तू

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प्रार्थना

पाप-अनल से घिरा हुआ जग, मनुज दुखी रोता है दया करो हे! जग-दुःख-त्राता, दास विनती करता है कृपासिंधु तुम! बूंद कृपा की, जीवन पर बरसा

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