काश , सिर्फ शब्द नहीं,
मरी या मृत तुल्य,
ख्वाहिशों का गुलदस्ता है l
जो कभी कभी,
या लम्हों के बीच कहीं,
थोड़ी,
बिन जल के मर रही
मत्स्य की तरह ,
जीने की कोशिश की ,
इच्छा रखता है ll
काश, मैं उड़ पाता पंक्षियों की तरह,
काश ,मैं हो पाता फिर से बच्चा ,
और फिर प्रकट कर पाता वह सभी भाव,
जो रह गए थे बचकाने में,
बोल पाता अपनी गुजरी हुई माँ को ,
प्रेम के वो सभी अधूरे से शब्द,
तोतली ही आवाज़ में सही,
काश, मैं दे पाता अपनी उम्र का कुछ हिस्सा,
उस हिस्से को,
जिसका हिस्सा है ये संपूर्ण हिस्सा ll
काश
काश
रचनाकार
Author

शिक्षा- M.Tech. (गोल्ड मेडलिस्ट) नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र, हरियाणा l संप्रति-आकाशवाणी रायबरेली (उ.प्र.) में अभियांत्रिकी सहायक के पद पर कार्यरत l साहित्यिक गतिविधियाँ- कई कवितायें व कहानियाँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं कैसे मशाल , रेलनामा , काव्य दर्पण , साहित्यिक अर्पण ,फुलवारी ,नारी प्रकाशन , अर्णव प्रकाशन इत्यादि में प्रकाशित l कई ऑनलाइन प्लेटफार्म पर एकल और साझा काव्यपाठ l आकाशवाणी और दूरदर्शन से भी लाइव काव्यपाठ l सम्मान- नराकास शिमला द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत व सम्मानित l अर्णव प्रकाशन से "काव्य श्री अर्णव सम्मान" से सम्मानित l विशेष- "साहित्यिक हस्ताक्षर" चैनल के नाम से यूट्यूब चैनल , जिसमें स्वरचित कविताएँ, और विभिन्न रचनाकारों की रचनाओं पर आधारित "कलम के सिपाही" जैसे कार्यक्रम और साहित्यिक पुस्तकों की समीक्षा प्रस्तुत की जाती है l पत्राचार का पता- आलोक सिंह C- 20 दूरदर्शन कॉलोनी विराजखण्ड लखनऊ, उत्तर प्रदेश Copyright@आलोक सिंह "गुमशुदा"/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


