सेमल के फूल

सेमल के फूल लाल -लाल ,

कितने लाल !

रंग दिये फागुन ने मौसम के गाल !

झर गया पुरानापन पीत पत्र संग

रंग-रूप नया-नया,नयी है उमंग

घोल रहा अमृत-सा कोकिल-स्वर

बौर-मौर-मंडित रसाल !

गली-गली गूंज रहा है वसंत-राग

गाते हैं मस्ती में युवा-वृद्ध फाग

बतरस में भींग रहा है पनघट

लगाता ठहाके चौपाल !

Facebook
WhatsApp
Twitter
LinkedIn
Pinterest

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

रचनाकार

Author

  • डॉ रवीन्द्र उपाध्याय

    प्राचार्य (से.नि.),हिन्दी विभाग,बी.आर.ए.बिहार विश्वविद्यालय,मुजफ्फरपुर copyright@डॉ रवीन्द्र उपाध्याय इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है| इन रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है|

Total View
error: Content is protected !!