शफक

वो वक्त जब
एक दीर्घ यात्रा
के बाद
निस्तब्ध दिशा पश्चिम में
अस्ताचल की और
जाते सूरज की
शफक भाव विभोर करती हैं
आँख से आत्मा तक
एक वन्दनीय छवि उकरआती हैं
सौम्यता से विशाल आकाश को छूना
और ज्वालामयी तेजस होकर भी
प्रस्थान की सीढियाँ उतरता हैं
निर्मलता से पग पग
क्योंकि अस्त में उतरने से पहले भी
सूरज मुस्कुराता हैं
गाता हैं
लिखता सुनहरी कलम से
शान से जीने और
गौरव से प्रस्थान के गीत

Facebook
WhatsApp
Twitter
LinkedIn
Pinterest

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

रचनाकार

Author

  • त्रिभुवनेश भारद्वाज "शिवांश"

    त्रिभुवनेश भारद्वाज रतलाम मप्र के मूल निवासी आध्यात्मिक और साहित्यिक विषयों में निरन्तर लेखन।स्तरीय काव्य में अभिरुचि।जिंदगी इधर है शीर्षक से अब तक 5000 कॉलम डिजिटल प्लेट फॉर्म के लिए लिखे।

Total View
error: Content is protected !!