तमन्नाएं

तमन्नाएं
हसरतें आरजुओं का
कोई अंत नहीं
संसारी,वीतरागी
इससे अछूता कोई सन्त नहीं
एक के बाद एक
नित नई अनेक
कामनाओं की कतार है
इस मामले में कोई
किनारें नहीं
सबके सब मझधार है
एक भी नही मिलता
जिसने अभीप्साएं समेट ली है
हर एक नज़र में चिड़ियां की आंख
और ख्वाबों की पोटली है

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रचनाकार

Author

  • त्रिभुवनेश भारद्वाज "शिवांश"

    त्रिभुवनेश भारद्वाज रतलाम मप्र के मूल निवासी आध्यात्मिक और साहित्यिक विषयों में निरन्तर लेखन।स्तरीय काव्य में अभिरुचि।जिंदगी इधर है शीर्षक से अब तक 5000 कॉलम डिजिटल प्लेट फॉर्म के लिए लिखे।

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